चंद्रशेखर आज़ाद ‘रावण’ को तुरंत रिहा किया जाये !

By Amnesty International India
Lucknow: 7 June 2018 2:53 pm

 

एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया और भीम आर्मी यह मांग करते हैं कि उत्तर प्रदेश सरकार चंद्रशेखर आज़ाद को प्रशासनिक हिरासत से तुरंत रिहा करे ।

 

“चंद्रशेखर आज़ाद ‘रावण’ दलितों के अधिकारों के लिए लड़ने के कारण पिछले एक साल से जेल में बंद हैं। दमनकारी कानूनों के तहत चंद्रशेखर आज़ाद को लगातार प्रशासनिक हिरासत में रखा जाना यह दर्शाता है कि उत्तर प्रदेश सरकार मानावाधिकार के गंभीर मुद्दों पर कार्यवाई करने के बजाये उनके खिलाफ हो रहे विरोध को दबाना ज़्यादा पसंद करती है,” एम्नेस्टी इंटरनेशनल इंडिया की कार्यक्रम निदेशक, अस्मिता बासु ने कहा ।

 

लखनऊ में प्रेस कांफ्रेंस के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए, एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया और भीम आर्मी ने रेखांकित किया कि कई महीनों से चंद्रशेखर आज़ाद को निष्पक्ष न्यायिक कार्यवाई से वंचित किया जा रहा है । उन्हें 2017 के सहारनपुर दंगों में कथित तौर पर शामिल होने के लिए पहली बार 8 जून 2017 को गिरफ्तार किया गया था। 2 नवंबर 2017 को, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उन्हें जमानत दी। सूचना के अनुसार, जमानत देने के दौरान अदालत ने कहा कि चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ मामले राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं। लेकिन, ज़मानत मिलने के एक ही दिन बाद, जेल से रिहा होने से पहले ही, उन्हें फिर से गिरफ्तार कर लिया गया – इस बार राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (रासुका) जैसे कड़े क़ानून के तहत। रासुका राज्य सुरक्षा और लोक व्यवस्था के रखरखाव हेतु 12 महीनों तक प्रशासनिक हिरासत की इजाज़त देता है। रासुका में इन आरोपों के दायरे को विस्तृत रूप से परिभाषित किया गया है। भारत में मानावाधिकार के लिए लड़ने वालों को दबाने के लिए कई बार रासुका का दुरूपयोग किया गया है ।

 

“चंद्रशेखर आज़ाद ‘रावण’  को जेल में ही बंद रखने के लिए राज्य सरकार ने कोई कसर नहीं रख छोड़ी है । आखिर उसने ऐसा क्या अपराध किया है?” भीम आर्मी के अध्यक्ष विनय रतन सिंह ने पूछा। “जब दंगे हो रहे थे तब इसी राज्य सरकार के अधिकारियों ने सहारनपुर में शांति बनाए रखने के लिए चंद्रशेखर आज़ाद की और भीम आर्मी की मदद मांगी थी। अब यही लोग कह रहे हैं कि अगर उन्हें रिहा किया जाता है, तो कानून व्यवस्था को खतरा पैदा हो सकता है,” विनय रतन सिंह ने कहा।

 

27 अप्रैल 2018 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने, चंद्रशेखर आजाद की, रासुका के तहत अपनी हिरासत के आदेश को रद्द करने की याचिका, खारिज कर दी।याचिका की सुनवाई के दौरान, उत्तर प्रदेश सरकार ने अदालत से कहा था कि अगर चंद्रशेखर आजाद को रिहा किया जाता है तो वे ऐसी गतिविधियों में शामिल होंगे जो ‘जाति की भावना फैलाएंगी’ और जिनसे ‘कानून व्यवस्था के रखरखाव पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा’। उच्च न्यायालय के आदेश के बाद, उत्तरप्रदेश सरकार ने रासुका के तहत चंद्रशेखर आजाद की हिरासत अगस्त 2018 तक और तीन महीने बढ़ा दी।

 

“चंद्रशेखर आजाद ‘रावण’ की हिरासत के रासुका के तहत आदेश को रद्द नहीं करने का इलाहाबाद उच्च न्यायालय का फैसला परेशान करने वाले प्रश्न उठाता है। यह बहुत ज़रूरी है कि अदालत सभी लोगों के आरोपों की निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार की रक्षा करे और आपराधिक न्याय प्रणाली को कमजोर न होने दे”, अस्मिता बासु ने कहा।

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से चंद्रशेखर आजाद ‘रावण’ की रिहाई की मांग करने के एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया के अभियान का देश भर से 140,000 से अधिक लोगों ने  समर्थन किया है। 4 अप्रैल को शुरू हुआ यह अभियान, लोगों को भीम आर्मी के नेता, चंद्रशेखर आजाद ‘रावण’ के लिए अपना समर्थन दिखाने के लिए 080-3045-6566 पर मिस्ड कॉल देने का अनुरोध करता है।

 

चंद्रशेखर आजाद ‘रावण’ की रिहाई की मांग के इस अभियान के बारे में अधिक जानकारी के लिए, कृपया हमारे `प्रोजेक्ट ब्रेव’ के वेबपेज पर जाएं: https://amnesty.org.in/campaign/meet-indias-brave/

 

पृष्ठभूमि:

प्रशासनिक हिरासत से सम्बंधित कानून लोगों को बिना आरोप या मुकदमे के हिरासत में रखने की अनुमति देते हैं । अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत  प्रशासनिक हिरासत को सिर्फ असाधारण परिस्थितियों में और कड़े सुरक्षा उपायों के साथ मंज़ूरी दी गयी है । भारत में, रासूका जैसे प्रशासनिक कानूनों का इस्तेमाल अक्सर अस्पष्ट आधार पर और सामान्य आपराधिक न्याय सुरक्षा नियमों की अनदेखी करते हुए, लोगों को हिरासत में रखने के लिए किया जाता रहा है । भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने प्रशासनिक हिरासत की व्यवस्था को “विधिहीन” की संज्ञा दी है। एमनेस्टी इंटरनेशनल प्रशासनिक हिरासत की सभी प्रणालियों का विरोध करता है।

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स्मृति सिंह
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