साल 2018 में हुए 200 से भी अधिक कथित घृणा-प्रेरित अपराध, `हॉल्ट द हेट’ वेबसाइट का खुलासा

Amnesty International India
Bengaluru/ New Delhi: 5 March 2019 11:02 am

“साल 2018 में समाज के हाशिये पर जी रहे समुदायों, खासकर दलितों और मुसलमानों के खिलाफ दर्ज किये गए हमले, बलात्कार और क़त्ल सहित सभी तरह के कथित घृणा-प्रेरित अपराधों की संख्या चिंताजनक है”, ऐसा आज एमनेस्टी इंडिया ने अपनी इंटरैक्टिव वेबसाइट ‘हॉल्ट द हेट‘ पर दर्ज़ किये गए आंकड़े जारी करते हुए कहा।

“ऐसे घृणा-प्रेरित अपराधों – जिनके तहत लोगों को किसी ख़ास समुदाय से होने की वजह से निशाना बनाया जाता है – उनमें न्याय सुनिश्चित करने और दंड-मुक्ति की स्थिति ख़त्म करने की ओर पहला कदम है इन अपराधों पर रोशनी डालना”, आकार पटेल, एमनेस्टी इंडिया ने कहा ।

“दुर्भाग्यवश, हम भारत में होनेवाले घृणा-प्रेरित अपराधों की व्यापकता से अनजान हैं क्योंकि कुछ अपवादों को छोड़कर, देश के क़ानून में घृणा-प्रेरित अपराधों को एक अलग श्रेणी के अपराधों के रूप में मान्यता नहीं दी गयी है। पुलिस को इन अपराधों के पीछे छिपी पक्षपाती मंशा या इरादे को उजागर करने की तरफ कदम उठाने चाहिए और राजनैतिक नेताओं को कड़े शब्दों में इन अपराधों की और ज़्यादा निंदा करनी चाहिए”।

गौ-रक्षकों की भीड़ द्वारा हिंसा से संबंधित याचिका के सुनवाई के तहत 17 जुलाई 2018 को सर्वोच्च न्यायालय ने भीड़ द्वारा हत्या को “कानून-व्यवस्था और संविधान के उच्च मूल्यों का अपमान ” बताया था। इसके साथ, न्यायलय ने सभी राज्य सरकारों को भीड़ के द्वारा हिंसा के खिलाफ निवारक, सुधारात्मक और दंडात्मक कदम उठाने के निर्देश भी दिए थे। नागरिक समाज संगठनों के अनुसार, इन दिशानिर्देशों का पर्याप्त रूप से पालन नहीं किया गया है।

मुख्य निष्कर्ष

‘हॉल्ट द हेट’ वेबसाइट दलितों, आदिवासियों, जातीय या धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय, ट्रांसजेंडर लोगों, प्रवासीयो समेत समाज के हाशिये पर जी रहे सभी समुदायों के खिलाफ कथित रूप से हुए  घृणा-प्रेरित अपराधों का संकलन करती है। यह संकलन अंग्रेजी और हिंदी मीडिया में रिपोर्ट किये गए मामलों पर आधारित है।

2018 में हमारी वेबसाइट पर कथित रूप से हुए घृणा-प्रेरित अपराधों के कुल 218 मामले दर्ज किये गए। इनमें से 142 मामलों के शिकार दलित थे, 50 के शिकार मुसलमान थे और इसाईओं, आदिवासियों और ट्रांसजेंडर, प्रत्येक समुदाय के खिलाफ आठ-आठ मामले दर्ज किये गए (रेखाचित्र 1 देखें) ।

रेखाचित्र 1

हमले के कुल 97 मामले हैं और कुल 87 लोगों की मृत्यु हुई । ऐसे 40 मामले हैं जिनमें  हाशिये पर जी रहे समुदायों से आनेवाली महिलाओं या ट्रांसजेंडर लोगों के साथ लैंगिक हिंसा की गयी हो । खासकर दलित महिलाओं को विशेष रूप से लैंगिक हिंसा का सामना करना पड़ा: लैंगिक हिंसा के 40 में से 30 मामलों की शिकार दलित महिलायें थीं (रेखाचित्र 2 देखें)।

रेखाचित्र 2

कथित रूप से हुए घृणा-प्रेरित अपराधों के मामले ज़्यादातर गाय-संबंधित हिंसा और बिरादरी के सम्मान की तथाकथित रक्षा के नाम पर की गयी हत्याओं से जुड़े थे।

सभी राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों, जहाँ से इन घृणा-प्रेरित अपराधों की खबरें दर्ज की गयीं, उनमें से सबसे ज्यादा मामलों वाले पांच राज्य हैं: उत्तर प्रदेश (57), गुजरात (22), राजस्थान (18), तमिल नाड (16) और बिहार (14)। लगातार तीसरे साल उत्तर प्रदेश में सबसे ज़्यादा (57) घृणा-प्रेरित अपराध दर्ज किये गए , जहाँ 2017 में 50 और 2016 में 60 मामले दर्ज किये गए थे (रेखाचित्र 3 देखें) ।

रेखाचित्र 3

वेबसाइट पर सितम्बर 2015 से हुए सभी घृणा-प्रेरित अपराधों को दर्ज किया गया है, जब दादरी (उत्तर प्रदेश) में कथित रूप से गौ-हत्या करने के लिए मुहम्मद अख़लाक़ को जान से मार दिया गया था। अंग्रेजी और हिंदी मीडिया में रिपोर्ट किये गए मामलों के ज़रिये इन घटनाओं को संकलित किया गया है । सितम्बर 2015 से अब तक, कथित रूप से हुए घृणा-प्रेरित अपराधों के कुल 721 मामले सामने आये हैं, जिनमें से एक बड़ी संख्या दलितों और मुसलामानों के खिलाफ हुए अपराधों की है ।

“हमारी वेबसाइट पर दिये गये आंकड़े पूरी तस्वीर का बस एक छोटा हिस्सा भर हैं । कई मामलों की शिकायत पुलिस से नहीं की जाती है, और जब शिकायत की भी जाती है तो कई बार मुख्यधारा के मीडिया में उसकी जानकारी नहीं आती। हालांकि कुछ मामलों में आपराधिक जांच शुरू की गयी है, लेकिन कई मामलों में अपराधी बच निकले हैं । पीड़ितों और उनके परिवारों को न्याय दिलाने के लिए अधिकारीयों को और प्रयत्न करने की ज़रुरत है”, आकार पटेल ने कहा ।

‘हॉल्ट द हेट’ वेबसाइट को सृष्टि स्कूल ऑफ़ आर्ट, डिज़ाइन और टेक्नोलॉजी (बेंगलुरु) द्वारा डिज़ाइन किया गया है।

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