प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में नागरिकता संशोधन क़ानून (सीएए) के खिलाफ हो रहे शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को कुचला जा रहा है

Amnesty International India
Bangalore / New Delhi / Varanasi: 17 January 2020 11:21 am

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों का दमन लगातार जारी है। नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 की आलोचना करने वालों को डराने-धमकाने और परेशान करने के लिए उत्तर प्रदेश राज्य सरकार द्वारा अत्यधिक बल का इस्तेमाल जारी है।

एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते हैं कि आलोचना लोकतंत्र को मजबूत बनाती है, वहीं राज्य सरकार प्रधानमंत्री के लोकसभा क्षेत्र वाराणसी में सीएए के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने वाले लोगों के अधिकारों की पूर्ण रूप से अवहेलना कर रही है। शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए अनुमति देने से इनकार किया गया है, प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, राज्य पुलिस ने अत्यधिक बल का इस्तेमाल किया है और राज्य के अधिकारी खुले-आम प्रदर्शनकारियों को डरा-धमका रहे हैं,” अविनाश कुमार, कार्यकारी निदेशक, एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया ने कहा ।

शहर के विभिन्न हिस्सों से दो दर्जन से अधिक लोगों के साथ बातचीत करने के बाद और उनके कथनों के समर्थन में सबूत इकट्ठा करने के बाद, एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया भारत के प्रधानमंत्री और उत्तर प्रदेश सरकार से मांग कर रही है कि वाराणसी और उत्तर प्रदेश के अन्य हिस्सों में शांतिपूर्ण रूप से सम्मिलित हो पाने के लोगों के अधिकारों के घोर उल्लंघनों को तुरंत रोका जाए ।

वाराणसी में, छात्रों, कार्यकर्ताओं और आम जनता द्वारा आयोजित शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन 13 दिसंबर को जैतपुरा पुलिस थाने के थानाप्रभारी (एसएचओ) द्वारा एक जुलूस को रोके जाने के बाद शुरू हुए। एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया से बात करते हुए, इस जुलूस में भाग लेने वाले एक कार्यकर्ता, आबिद शरीफ ने कहा, “जब हम यह जुलूस शुरू करने वाले थे, तो एसएचओ शशि भूषण राय ने हमसे मुलाकात की और विरोध मार्च आयोजित करने का कारण पूछा। जब हमने उन्हें बताया कि हम सीएए और एनआरसी (राष्ट्रीय नागरिकता सूची) के खिलाफ विरोध कर रहे हैं, तो उन्होंने हमें धमकाना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा, “अगर आपको विरोध करना है, तो घर पर करें। क्या सड़क आपके बाप की है? मैं तुम्हारे परिवार को बर्बाद कर दूंगा। नया कानून लागू किया जाएगा”। वाराणसी पुलिस ने घटना की जांच के आदेश दिए हैं, लेकिन वाराणसी के दो प्रमुख विरोधों में से एक, बेनिया बाग में हुए विरोध प्रदर्शन से संबंधित जांच में राय अभी भी जांच अधिकारी के पद पर बने हुए हैं। दूसरा बड़ा विरोध 20 दिसंबर को बजरडीहा में हुआ। इन दोनों विरोधों के लिए पुलिस की जवाबी कार्रवाई दमनकारी तरीकों, बल का अत्यधिक उपयोग, मनमानी गिरफ्तारी और भेदभाव से पूर्ण रही है।

11 और 23 दिसंबर 2019 के बीच, वाराणसी में सीएए के खिलाफ शांतिपूर्वक विरोध प्रदर्शन के लिए 70 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया ने यह भी पाया कि पुलिस ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों और प्रदर्शन देख रही मासूम आम जनता पर अंधाधुंध लाठियाँ भी बरसाई हैं। इसके कारण एक 8 साल के बच्चे की कुचल-कर मौत भी हो गई और एक दर्जन से अधिक लोग घायल हो गए।

गिरफ्तार किये  गए व्यक्तियों के परिवारों के साथ बातचीत से यह पता चला है कि पुलिस ने गिरफ्तारी के दौरान भी हिंसा का इस्तेमाल किया। मोहम्मद तुफैल, जिनके भतीजे मोहम्मद नसीम को पुलिस ने आधी रात में बजरडीहा में गिरफ्तार किया था, ने कहा, “पुलिस उसके कमरे में  घुस गई और उसे उठा ले गई। उन्होंने एक दरवाज़ा तोड़ा, जो उसके सोए हुए पिता पर गिरा। जब हमने पुलिस से गिरफ्तारी का आधार पूछा, तो उन्होंने कुछ नहीं कहा और नसीम को घसीटकर ले गए। थाने तक जाते वक़्त रस्ते में पुलिस ने उसे लाठियों से मारा। जब हम उससे जेल में मिले, तो उसने हमें बताया कि उसे पुलिस स्टेशन में भी प्रताड़ित किया गया था। हमने उसे दर्द में देखा।”

गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों को जेल में भी सताया और डराया-धमकाया गया। एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया से बात करते हुए, इक़बाल, वाराणसी में एक दुकानदार और हिरासत में लिए गए एक प्रदर्शनकारी ने कहा, “जेल प्रशासन हमसे बदसलूकी करते रहे। हमें दो सप्ताह से अधिक समय तक कैद में रखा गया। जेल अधिकारी हिंदू प्रदर्शनकारियों से पूछते रहे कि वे मुसलमानों का समर्थन क्यों कर रहे थे। एक दिन, उन्होंने दो घंटे से अधिक समय तक हमसे जेल की सफाई करवाई। उन्होंने हमें जो कम्बल दिए वो बहुत पतले थे और वे हमें सर्दी जुकाम से बचाने के लिए काफी नहीं थे।”

गिरफ्तार किए गए अधिकांश लोगों को जमानत मिलाने के बावजूद 15 से भी ज़्यादा दिनों के लिए हिरासत में रखा गया था। गिरफ्तार व्यक्तियों को वकील की मदद मुहैया कराने में जेल अधिकारियों द्वारा अत्यधिक देरी का भी एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया ने दस्तावेजीकरण किया है। एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया से बात करते हुए, एक जलवायु परिवर्तन कार्यकर्ता, एकता शेखर, जिन्हें विरोध प्रदर्शन के लिए गिरफ्तार किया गया था, ने कहा, “शांतिपूर्ण विरोध के बावजूद, हमें गिरफ्तार कर लिया गया। मैं जिला मजिस्ट्रेट से रहम के आधार पर जमानत देने का अनुरोध करना चाहती थी क्योंकि मुझे अपने 14 महीने के बच्चे की देखभाल करनी थी। तीन दिनों के लिए, हमें अपने परिवार के सदस्यों और वकीलों से संपर्क नहीं करने दिया गया। हमारे साथ शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों जैसा नहीं बल्कि दंगाइयों जैसा सलूक किया गया।”

“प्रधानमंत्री और उत्तर प्रदेश सरकार को यह समझना चाहिए कि शांतिपूर्ण विरोध करना अपराध नहीं है। यह एक अधिकार है। प्रधानमंत्री को आगे आकर उदाहरण पेश करना चाहिए कि उनके निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी में शांतिपूर्ण विरोध को नहीं कुचला जायेगा। प्रधानमंत्री को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उत्तर प्रदेश सरकार पुलिस की बर्बरता के सभी मामलों में एक स्वतंत्र जांच स्थापित करे। जिम्मेदार लोगों पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए,”अविनाश कुमार ने कहा।

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