घरेलू हिंसा होते हुए देखने पर आप कैसे मदद कर सकते हैं

Amnesty International India
14 May 2020 12:39 pm

अभी, भारत में एक राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन (तालाबंदी) लागू होने के कारण, कई महिलाएँ उनके साथ दुर्व्यवहार करने वालों के साथ घरों में बंद हैं और कहीं और जा पाने की स्थिति में नहीं हैं। राष्ट्रीय महिला आयोग और समाचार रिपोर्टों के अनुसार, लॉकडाउन के कारण घरेलू हिंसा के मामलों में साफ़ तौर पर वृद्धि हुई है।

ऐसा सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि विश्व स्तर पर भी देखा गया है कि ज़्यादा से ज़्यादा महिलाएँ घरेलू हिंसा की रिपोर्ट दर्ज़ करा रही हैं। संयुक्त राष्ट्र की महिला इकाई ने महिलाओं और लड़कियों के साथ हिंसा को नॉवल कोरोनवायरस के समानांतर फैल रही एक ‘छाया महामारी’ की संज्ञा दी है। फ्रांस जैसे राष्ट्रों ने हिंसा को रोकने और महिलाओं को मदद उपलब्ध कराने के लिए सक्रिय रूप से कदम उठाए हैं। भारत में राष्ट्रीय महिला आयोग ने घरेलू हिंसा में बढ़ोत्तरी का संज्ञान लेते हुए, मामलों की जल्द और ज़्यादा-से-ज्यादा रिपोर्टिंग के लिए एक व्हाट्सएप नंबर शुरू किया है।

फिलहाल, जब पीड़ितों के लिए सहायता प्राप्त करना सबसे ज़्यादा मुश्किल है, तो इस वक़्त हमारे लिए एक समुदाय के रूप में आगे आकर महिलाओं की मदद करना बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। घरेलू हिंसा होते हुए देखने पर मदद के सामने आना न सिर्फ हिंसा को होने से रोक सकता है, बल्कि पीड़िताओं को हिंसा की रिपोर्ट दर्ज कराने का विश्वास भी दिला सकता है।

यदि आप अपने घर या अपने आस-पड़ोस में घरेलू हिंसा को होते हुए देखें या किसी ऐसे मित्र, सहकर्मी या परिचित को जानते हों जो घरेलू हिंसा का शिकार हो, तो आप उनकी मदद करने के लिए कदम बढ़ा सकते हैं। यहाँ कुछ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न और उनके उत्तर दिए गए हैं जो आपकी इसमें मदद कर सकते हैं:

1. घरेलू हिंसा क्या है?

सरल शब्दों में, भारतीय कानून के तहत, निम्नलिखित कृत्य करना या करने की धमकी देना, घरेलू हिंसा है:

  • शारीरिक दुर्व्यवहार [किसी भी प्रकार का शारीरिक दर्द या हानि पहुँचाना]
  • मानसिक, मौखिक और भावनात्मक दुर्व्यवहार [अपमान, उपहास, तिरस्कार, गाली या धमकी देना]
  • आर्थिक दुर्व्यवहार [किसी को सभी या कुछ आर्थिक या वित्तीय संसाधनों से वंचित रखना]
  • यौन दुर्व्यवहार [एक महिला की गरिमा के प्रति दुर्व्यवहार, उसका अपमान या तिरस्कार या उसका उल्लंघन करना]

2. खुद पीड़ित न होने के बावजूद भी क्या मैं घरेलू हिंसा का मामला दर्ज कर सकती/ सकता हूँ?

जी हाँ, कोई भी व्यक्ति जिसे वास्तव में लगता है कि घरेलू हिंसा की घटना हुई है या घरेलू हिंसा होने का ख़तरा है, वह इसकी रिपोर्ट कर सकती/ सकता है। रिपोर्ट करने से पहले पीड़िता की सहमति लेना बेहतर होता है। ध्यान रखें कि अगर पीड़िता की सहमति के बिना अधिकारियों को सतर्क किया जाए, तो इसके परिणाम पीड़िता को भुगतने पड़ सकते हैं या फिर यह उन्हें खतरे में डाल सकता है। महिलाओं के खिलाफ हिंसा एक दंडनीय अपराध है और अपराधियों पर न्यायिक कार्यवाही की जानी चाहिए।

3. घरेलू हिंसा के खिलाफ क्या कानून हैं?

घरेलू हिंसा से बचाव के लिए 2 मुख्य कानून हैं जिन के आधार पर कार्रवाई की जा सकती हैं:

  • घरेलू हिंसा से महिलओं का संरक्षण अधिनियम 2015

यह अधिनियम घर में मौजूद महिलाओं (पत्नियों, साथ रह रहे जोड़ीदारों, बहनों, माताओं, बेटियों, विधवाओं) के पति और/या अन्य पुरुष रिश्तेदारों से रक्षा करता है। इसके ज़रिये हिंसा मुक्त घर में रहने के महिला के अधिकार को संरक्षित करने का प्रयास किया गया है। यह एक नागरिक कानून (सिविल लॉ) है और इस अधिनियम के तहत एक महिला के निवास के अधिकार और घरेलू हिंसा को रोकने के लिए अदालत से सुरक्षा आदेश प्राप्त करने के अधिकार को मान्यता दी गयी है। इसे आपराधिक रूप से लागू नहीं किया जा सकता है, अर्थात इस अधिनियम के तहत दुर्व्यवहार करने वाले पर कोई दंड या जुर्माना नहीं लगाया जाता है। लेकिन, अदालत द्वारा दिए गए आदेश का उल्लंघन करने वाले को दंडित ज़रूर किया जा सकता है।

  • भारतीय दंड संहिता, 1860

भारतीय दंड संहिता के तहत, धारा 498-ए विशेष रूप से विवाहित महिलाओं को उनके पति और पति के परिवार द्वारा क्रूरता से रक्षा प्रदान कराती है। इसके अतिरिक्त, कानून के अन्य प्रावधान बलात्कार, मारपीट, यौन उत्पीड़न, एसिड हमले, पीछा करना, ताक-झाँक और किसी महिला को बल-पूर्वक निर्वस्त्र करने जैसे मामलों में महिलाओं को संरक्षण प्रदान करते हैं। लेकिन, यहां यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि वैवाहिक बलात्कार को अभी भी क़ानूनन मान्यता नहीं दी गई है और उसके खिलाफ मुकदमा दायर नहीं किया जा सकता है।

4. घरेलू हिंसा होते हुए देखने वालों के द्वारा कार्रवाई (बायस्टैंडर एक्शन) क्या होती है?

घरेलू हिंसा होते हुए देखने वाले लोगों द्वारा कार्रवाई कई  प्रकार का रूप ले सकती है। यह किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा की गई कार्रवाई है जो सीधे तौर पर दुर्व्यवहार की घटना में शामिल नहीं है, जिसमें घरेलू हिंसा के मामले की पहचान करना, उसके ख़िलाफ़ आवाज़ उठाना, मदद के लिए कदम उठाना शामिल है।

5. घरेलू हिंसा एक निजी मामला है, मैं इसमें हस्तक्षेप क्यों करूँ?

हो सकता है कि घरेलू हिंसा एक निजी या पारिवारिक मामले जैसा लगे, लेकिन ऐसा है नहीं। बल्कि, यह एक मानवाधिकार उल्लंघन है जिसमें हस्तक्षेप करने की आवश्यकता है ताकि हिंसा के चक्र को तोड़ा जा सके। घरेलू हिंसा होते देखने पर आप यह कदम उठा सकते हैं:

  • पीड़िता को समर्थन देने के लिए एक नेटवर्क बनाना और पीड़िता को विश्वास दिलाना कि वे अकेली नहीं है और ज़रुरत पड़ने पर वह अपने पड़ोसियों की मदद ले सकती हैं
  • हिंसा की किसी घटना को होने से रोकना
  • हिंसा के बढ़ने के खतरे को कम करना
  • ऐसी हिंसा से होने वाले शारीरिक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक हानि को रोकना
  • घरेलू हिंसा की रोकथाम के लिए काम करने वाले तंत्र/प्राधिकरणों को मजबूत बनाना
  • लिंग, उम्र, विकलांगता, जातीयता और पीड़िता और अपराधी के पारिवारिक संबंधों को इंगित करते हुए श्रेणीबद्ध रूप से विश्वसनीय और सटीक जानकारी का स्थानीय स्तर पर संकलन

6. घरेलू हिंसा होते हुए देखने वाले के रूप में क्या कर सकता हूं?

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7. मैं पीड़िता/जीविता के लिए और क्या कर सकता हूँ?

सबसे बेहतर है जीविता से ही पूछना कि आप उनकी मदद कैसे कर सकते हैं। इसके अलावा, स्थानीय महिला अधिकार संगठनों से संसाधनों के साथ-साथ उन तरीकों के बारे में पूछें जिनके ज़रिये आप किसी जीविता की मदद कर सकते हैं। यदि उस व्यक्ति को रहने की जगह की आवश्यकता हो तो महिला आश्रय गृह में उनके ठहरने की व्यवस्था करने और उन्हें वहाँ ले जाने में मदद करने की कोशिश करें। यदि मामला मजिस्ट्रेट के सामने लाया जाता है, तो जीविता के साथ अपने अनुभव के आधार पर गवाही देने के लिए तैयार रहें।

8. यदि पीड़िता/जीविता को चोट लगी हो तो मुझे क्या करना चाहिए?

यदि आप किसी जीविता के शरीर पर प्रत्यक्ष रूप से शारीरिक शोषण के निशान देखते हैं, तो उन्हें डॉक्टर के पास ले जाने की पेशकश करें। उनकी सहमति से, निशानों की फ़ोटो लेने में उनकी सहायता करें। प्राथमिक उपचार के लिए आप निजी और सार्वजनिक दोनों तरह के अस्पतालों में जा सकते हैं। अस्पताल प्रशासन से चिकित्सा-विधिक प्रमाण पत्र लेना सुनिश्चित करें। यह चिकित्सा-विधिक प्रमाण पत्र प्राप्त करना जीविता का अधिकार है और यह जीविता को आई चोटों का आधिकारिक सबूत होगा।

9. दुर्व्यवहार करने वाले का सामना करते वक़्त मैं अपनी सुरक्षा कैसे सुनिश्चित कर सकती / सकता हूँ?

यदि आप दुर्व्यवहार करने वाले का सामना करने का फैसला करते हैं, तो निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखें:

  • किसी भी सूरत में, हिंसा और धमकी का इस्तेमाल न करें
  • अपनी खुद की सीमाओं को ध्यान में रखें और ऐसा कुछ भी करने की कोशिश न करें जिसके बारे में आप अनिश्चित महसूस करते हों। सिर्फ वही कदम उठाए, जिसमें आप सहज महसूस करते हों।
  • यदि ज़रूरी हो तो मदद के लिए दूसरों को बुलायें
  • जो आप करना चाहते हैं उसे योजनाबद्ध तरीके से करें और जो आप कहना चाहते हैं उसका अभ्यास करें
  • बातचीत किसी सुरक्षित वातावरण में करें
  • दुर्व्यवहार करने वाले का सामना करने से पहले किसी ऐसे व्यक्ति को सूचित करें जिसे आप जानते हों या जिस पर आप भरोसा करते हों
  • जीविता की सुरक्षा सुनिश्चित करें ताकि दुष्कर्मी टकराव के बाद अधिक दुर्व्यवहार करने की चेष्टा न करे

 

10. अगर दुर्व्यवहार करने वाला मुझे हिंसा की धमकी देता है तो मैं क्या कर सकती / सकता हूँ?

यदि स्थिति बहुत गंभीर हो जाए और दुर्व्यवहार करने वाला आपको धमकी देता है, तो तुरंत पुलिस को फोन करें।

 

11. घरेलू हिंसा के मामले को साबित करने के लिए किस तरह के कानूनी सबूत की आवश्यकता है?

हालांकि कुछ प्रकार की घरेलू हिंसा को साबित करना मुश्किल हो सकता है, लेकिन दुर्व्यवहार के सबूत के रूप में जिन साक्ष्यों को प्रस्तुत किया जा सकता है वे हैं – ईमेल, व्हाट्सएप पर हुई बातचीत, एसएमएस संदेश, ऑडियो/ वीडियो/कॉल रिकॉर्डिंग और लगातार दिए गए मिस्ड कॉल के स्क्रीनशॉट जो खराब व्यवहार या अत्याचारपूर्ण संबंधों का संकेत देते है।

इसके अलावा, हेल्पलाइन पर किये गए पिछली कॉल या पुलिस रिपोर्ट के रिकॉर्ड भी सबूत के तौर पर जमा किए जा सकते हैं। शारीरिक दुर्व्यवहार के मामले में, चिकित्सा-विधिक प्रमाण पत्र और चोट के निशान/घाव/शारीरिक क्षति की तस्वीरें भी सबूत के रूप में  पेश की जा सकती हैं। हालांकि घरेलू हिंसा के मामलों में चश्मदीद गवाही मिलना मुश्किल होता है, लेकिन अगर किसी को दुर्व्यवहार के बारे में पता हो या उसने दुर्व्यवहार को होते हुए देखा हो, तो वे खुद गवाही दे सकते हैं।

12. अगर पीड़िता/जीविता मदद नहीं चाहती है, तो मैं क्या कर सकती / सकता हूँ?

घरेलू हिंसा के पीड़ितों/जीवितों के लिए, वह जिस दुर्व्यवहार का सामना कर रहे हैं, उसके बारे में बात करना मुश्किल हो सकता है। इन स्थितियों के साथ अपमान का धब्बा लगने का डर जुड़ा होता है और कई पीड़िता/जीविता दुर्व्यवहार करने वाले पर आर्थिक रूप से भी निर्भर होते हैं। हो सकता है कि पीड़ित महिला समस्या से ही मुकर जाए या उसके बारे में किसी भी बातचीत से बचे। यदि ऐसा है, तो उनकी गोपनीयता का सम्मान करें और उनके बिनाह पर कार्रवाई न करें या अगर वह तैयार नहीं हों तो कार्रवाई करने के लिए उन्हें मजबूर न करें। ऐसा करना उन मामलों में खासकर मुश्किल हो सकता है जहाँ आपको लगता है कि उन्हें या उनके बच्चों को नुकसान पहुंचने की संभावना है। लेकिन यह निर्णय उन्हें खुद लेना है और उनको जो वक़्त सही लगे, तब लेना है। साथ ही साथ, घरेलू हिंसा का शिकार होने वाली महिलाएँ जिन लांछन का सामना कराती हैं उसे दूर करने की कोशिश करें और उनको न्याय माँगने के लिए प्रोत्साहित करें। उन्हें बताएँ कि अगर वह हिंसा के बारे में बात करने या कार्रवाई करने का निर्णय लेती हैं तो आप तब उनकी मदद करने और उन्हें समर्थन देने के लिए मौजूद हैं।

13. क्या घरेलू हिंसा में कभी भी पीड़िता/जीविता की ग़लती होती है?

जी नहीं, घरेलू हिंसा में पीड़िता की कोई ग़लती नहीं होती। घरेलू हिंसा एक अपराध है। हिंसा का सामना करने वाली महिला, खुद से या दूसरों की मदद से, ऐसी स्थिति से बाहर निकलने का निर्णय ले सकती है। लेकिन, यह भी संभव है कि घरेलू हिंसा से पीड़ित व्यक्ति के पास ऐसा कर पाने के लिए ज़रूरी समर्थन या आत्मविश्वास न हो।

हो सकता है कि अन्य विकल्पों के अभाव की वजह से भी वे दुर्व्यवहार के चक्र को नहीं छोड़ पाए। पीड़िता के दुर्व्यवहार की स्थिति को नहीं छोड़ पाने के पीछे कई कारण होते हैं – वे आर्थिक/वित्तीय रूप से दुष्कर्मी पर निर्भर हो सकती है, उनके पास ऐसे अन्य सहायक नेटवर्क (परिवार/दोस्त) का अभाव हो सकता है जिसका वे सहारा ले सकें, अगर बच्चे शामिल हों, तो दुर्व्यवहार करने वाले को छोड़ कर जाने के बुरे परिणामों का डर हो सकता है, आदि।

फिलहाल, कोविड-19 महामारी और लॉकडाउन के संदर्भ में, पीड़ित महिला बाहरी मदद से दूर हैं और हिंसक जोड़ीदारों के साथ घर में बंद हैं। मुमकिन है कि उनके पास दुर्व्यवहार की स्थिति छोड़ कर जाने का कोई तरीका न हो। सामान्य परिस्थितियों में भी, घरेलू हिंसा की रिपोर्ट कम ही दर्ज की जाती है। घर के अंदर दुर्व्यवहार का सामना करने वाली महिलाओं के लिए विकल्पों को, कोविड-19 महामारी ने और सीमित कर दिया है। यह बहुत ज़रूरी है कि घरेलू हिंसा का सामना कर रही महिला पर विश्वास किया जाए और अपनी ओर से ही फैसला न सुनाया जाए क्योंकि यह उन्हें बहिष्कृत महसूस करा सकता है और दुर्व्यवहार के चक्र को तोड़ने के प्रति उन्हें और हतोत्साहित कर सकता है।

 

14. घरेलू हिंसा का कानून केवल महिलाओं को रक्षा प्रदान करता है, जबकि अन्य लोग भी घरेलू हिंसा का सामना कर सकते हैफिर यह विशेष प्रावधान क्यों?

जबकि घरेलू हिंसा किसी को भी प्रभावित कर सकती है, चाहे उनका लिंग कुछ भी हो, लेकिन इस सवाल का सटीक जवाब, वर्ष 2006 में अधिनियम पारित किये जाने के समय, तत्कालीन महिला और बाल विकास मंत्री, रेणुका चौधरी ने दिया था – “एक लिंग-समान कानून आदर्श होगा। लेकिन यह साबित करने के लिए अत्यधिक भौतिक साक्ष्य मौजूद हैं कि मुख्य रूप से महिलाएँ ही हैं जो पुरुषों के हाथों पीड़ित की जाती हैं।” इस वास्तविकता को ध्यान में रखते हुए, ऐसे घरेलू हिंसा कानून का होना ज़रूरी है जो महिलाओं की विशेष रूप से रक्षा करता है। इस अवस्था में, एक लिंग-समान कानून, फायदे से ज्यादा नुकसान करेगा।

Written by Nayantara Raja, Campaigner, Gender and Identity-based Violence, Amnesty International India.

Featured image credit: Reuters | Adnan Abidi